जीवंत प्रेम की लपट
ओह! जीवंत प्रेम की लपटें
जो कोमलता से घायल करती
मेरे हृदय के सबसे अंदरूनी हिस्से में!
बस अब और नही बच सकत
खत्म करो अब अगर ऐसा तुम चाहत हो,
इस मधुर मिलन की बाधक, चिलमन को उतार दो!
ओह कोमल दहन!
ओह उपहार में दिया गया दाह!
ओह कोमल हाथ! ओह कोमल छुअन
जिसे सारी जिदगी जानती
सारे उधार चुक जात;
विलीन होत,जिसमें विनिमय तुम जीवन मृत्यु का करते।
ओह जलते लैम्प!
जिसकी चकाचौध में
ज्ञानेन्द्रियो की गहरी गुफाओ में,
जो पहले थी अंधरी और अंधी,
अजीबोगरीब चमक से
देती ऊष्मा और प्रकाश, अपने प्रेमी के साथ!
कितनी खामोशी और प्रेम से
मेरे हृदय में विचारित होत,
जहां गोपनीयता से केवल तुम्ही रहत,
और तुम्हारे खुशबू से भरी साँसो में
अच्छाई और गौरव को मैं रखता,
कितनी कोमलता से तुम मेरे प्रेमी होते!

San Juan de la Cruz
Traducción: Sabyasachi Mishra